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भारत में क्रिप्टो ख़रीदने, रखने और बेचने पर कोई पाबंदी नहीं है। इस पर टैक्स लगता है और एंटी-मनी-लॉन्ड्रिंग के लिए इसे रेगुलेट किया जाता है, लेकिन यह लीगल टेंडर नहीं है।
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अप्रैल 2018 में रिज़र्व बैंक ने अपने दायरे के बैंकों और पेमेंट कंपनियों से "वर्चुअल करेंसी" से जुड़ी सेवाएं बंद करने को कहा।
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4 मार्च 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने RBI के सर्कुलर को अनुपातहीन मानकर रद्द कर दिया, जिससे एक्सचेंजों के लिए बैंकिंग फिर खुल गई।
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फ़ाइनेंस एक्ट, 2022 ने VDA की श्रेणी बनाई: 1 अप्रैल 2022 से मुनाफ़े पर 30% टैक्स और 1 जुलाई 2022 से ट्रांसफ़र पर 1% TDS।
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मार्च 2023 से भारतीयों को सेवा देने वाले क्रिप्टो सर्विस प्रोवाइडर्स को FIU-IND में रजिस्टर होना ज़रूरी है। दिसंबर 2023 में FIU-IND ने नौ ऑफ़शोर एक्सचेंजों के URL ब्लॉक करने की मांग की।
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आयकर अधिनियम, 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ। 30% का नियम और 1% TDS जारी हैं, अब धारा 194 और 393 में।
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सामान्य जानकारी, टैक्स सलाह नहीं।