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भारत में क्रिप्टो, 2026: नियम और टैक्स की पूरी जानकारी

क्या भारत में क्रिप्टो कानूनी है? नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत इस पर टैक्स कैसे लगता है? FIU-IND रजिस्ट्रेशन का आपके लिए क्या मतलब है? स्रोतों के साथ, आसान भाषा में।

BtcMedia Research ·

विषय सूची
  1. क्या भारत में क्रिप्टो कानूनी है?
  2. रेगुलेटर और उनका रुख़
  3. क्रिप्टो पर टैक्स कैसे लगता है
  4. निगरानी का दायरा बढ़ रहा है
  5. भारतीय क्रिप्टो निवेशकों के लिए चेकलिस्ट
  6. निष्कर्ष

क्रिप्टो की दुनिया में भारत की स्थिति अनोखी है। यहां दुनिया के सबसे ज़्यादा क्रिप्टो यूज़र्स वाले देशों में से एक है, टैक्स व्यवस्था दुनिया में सबसे सख्त व्यवस्थाओं में गिनी जाती है, और एक्सचेंजों के लिए एंटी-मनी-लॉन्ड्रिंग रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। फिर भी, क्रिप्टो को एक एसेट क्लास के तौर पर रेगुलेट करने वाला कोई पूरा कानून अभी तक नहीं है। यह लेख बताता है कि अक्टूबर 2026 तक स्थिति क्या है: क्या कानून है, क्या सिर्फ़ प्रस्ताव है, और एक आम निवेशक के लिए इसका क्या मतलब है।

ज़रूरी: यह सामान्य जानकारी है, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। टैक्स नियम हर व्यक्ति के अपने तथ्यों पर लागू होते हैं। रिटर्न भरने से पहले किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट से बात करें।

क्या भारत में क्रिप्टो कानूनी है?

भारत में क्रिप्टो रखना, खरीदना और बेचना गैर-कानूनी नहीं है। लेकिन “कानूनी” होना और “रेगुलेटेड” होना दो अलग बातें हैं।

  • क्रिप्टो को मुद्रा, सिक्योरिटी या रेगुलेटेड प्रोडक्ट मानने वाला कोई अलग कानून नहीं है। निजी क्रिप्टोकरेंसी पर रोक लगाने वाला 2021 का मसौदा विधेयक संसद में कभी पेश नहीं हुआ, और क्रिप्टो नीति पर सरकार का डिस्कशन पेपर बार-बार टलता रहा है (Reuters, जुलाई 2026)। अप्रैल 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ यह कम से कम पांचवीं बार टला था (The Crypto Times)।
  • क्रिप्टो पर टैक्स लगता है (और भारी लगता है), और क्रिप्टो कारोबार एंटी-मनी-लॉन्ड्रिंग कानून के दायरे में आते हैं।

यानी सरकार का मौजूदा रुख़ कुछ ऐसा है: टैक्स लगाओ, नज़र रखो, लेकिन मान्यता मत दो।

रेगुलेटर और उनका रुख़

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)

RBI अब भी सबसे ज़्यादा संशय रखने वाली आवाज़ है। 2026 में वित्त पर संसद की स्थायी समिति के सामने RBI अधिकारियों ने “प्रतिबंध की ओर झुकी, संतुलित नियंत्रण रणनीति” का समर्थन किया। इसका मतलब है बैंकों और रेगुलेटेड संस्थानों को क्रिप्टो एसेट्स और निजी तौर पर जारी स्टेबलकॉइन्स से पूरी तरह अलग रखना, और क्रिप्टो को पेमेंट व सेटलमेंट से बाहर रखना। RBI ने कहा कि प्रतिबंध पर “सावधानी से विचार किया जाना अब भी उचित है” (Economic Times)।

ग़ौर करने वाली बात यह है कि RBI सट्टेबाज़ी वाले निजी क्रिप्टो और टोकनाइज़्ड सरकारी प्रतिभूतियों में फ़र्क़ करता है। वह चाहता है कि टोकनाइज़्ड प्रतिभूतियां रेगुलेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर पर विकसित हों (The Crypto Times)।

संसद की वित्त समिति

प्रस्तावित सिक्योरिटीज़ मार्केट्स कोड, 2025 पर 23 जुलाई 2026 को पेश अपनी रिपोर्ट में वित्त पर स्थायी समिति ने सुझाव दिया कि जब तक पूरा कानूनी ढांचा नहीं बनता, सरकार SEBI या RBI जैसे किसी वैधानिक रेगुलेटर की निगरानी में सेल्फ़-रेगुलेटरी ऑर्गनाइज़ेशन (SRO) द्वारा चलाई जाने वाली अंतरिम व्यवस्था पर विचार करे (MediaNama, The Crypto Times)।

यह सिर्फ़ सिफ़ारिश है, कानून नहीं। MediaNama में उद्धृत इंडस्ट्री के लोगों ने आगाह किया कि इसे नीति में पक्का बदलाव न समझा जाए।

FIU-IND (एंटी-मनी-लॉन्ड्रिंग)

मार्च 2023 की एक सरकारी अधिसूचना के बाद से वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर (VDA SP), यानी एक्सचेंज, कस्टोडियन, वॉलेट प्रोवाइडर वग़ैरह, धन-शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत “रिपोर्टिंग एंटिटी” हैं। उन्हें फ़ाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट–इंडिया में रजिस्टर करना, KYC करना, रिकॉर्ड रखना और संदिग्ध लेन-देन की रिपोर्ट देना ज़रूरी है (FIU-IND सर्कुलर)।

जनवरी 2026 में जारी अपडेटेड AML/CFT दिशानिर्देश साफ़ करते हैं कि ये दायित्व गतिविधि पर आधारित हैं और भारत में भौतिक मौजूदगी हो या न हो, लागू होते हैं। भारतीय यूज़र्स को सेवा देने वाले विदेशी एक्सचेंज को भी रजिस्टर करना होगा, वरना PMLA की धारा 13 के तहत कार्रवाई हो सकती है (FIU-IND दिशानिर्देश, जनवरी 2026)।

Economic Times के अनुसार भारत में 54 FIU-रजिस्टर्ड क्रिप्टो सर्विस प्रोवाइडर हैं, और लगभग 3.93 करोड़ KYC-वेरिफ़ाइड यूज़र्स के पास क्रिप्टो एसेट्स हैं (ET)।

आपके लिए इसका मतलब: FIU-रजिस्टर्ड प्लेटफ़ॉर्म ही इस्तेमाल करें। बिना रजिस्ट्रेशन वाले विदेशी प्लेटफ़ॉर्म पर रखे पैसे तक पहुंच और कार्रवाई, दोनों का असली जोखिम है। हमारी भारतीय एक्सचेंजों की तुलना में हर एक्सचेंज की स्थिति देखें।

क्रिप्टो पर टैक्स कैसे लगता है

”VDA” किसे कहते हैं?

टैक्स कानून वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) शब्द का इस्तेमाल करता है। मोटे तौर पर इसमें कोई भी जानकारी, कोड, नंबर या टोकन (भारतीय या विदेशी मुद्रा को छोड़कर) आता है जो क्रिप्टोग्राफ़िक या दूसरे तरीक़ों से बना हो, मूल्य का डिजिटल रूप देता हो और जिसे इलेक्ट्रॉनिक रूप से ट्रांसफ़र, स्टोर या ट्रेड किया जा सके। NFT भी इसमें शामिल हैं (आयकर विभाग, धारा 115BBH का पाठ)।

नया अधिनियम: नियम वही, धारा नंबर नए

भारत का प्रत्यक्ष कर कानून आयकर अधिनियम, 2025 के रूप में दोबारा लिखा गया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू है। इसमें क्रिप्टो से जुड़े नियम नए धारा नंबरों के साथ आगे बढ़ाए गए हैं, और VDA की परिभाषा में अब “क्रिप्टो-एसेट” साफ़ तौर पर शामिल है (Candour Legal)। Tax Garden के मुताबिक़ पुरानी धारा 115BBH (VDA आय पर टैक्स) नए अधिनियम की धारा 194 बन गई है, और पुरानी धारा 194S (TDS) अब धारा 393 है। बजट 2026 ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया।

ज़्यादातर लेख (और वित्त वर्ष 2025-26 का आपका रिटर्न) अब भी पुराने नंबर इस्तेमाल करते हैं, इसलिए नीचे हम दोनों लिख रहे हैं।

नियम 1: मुनाफ़े पर सीधा 30%

VDA के ट्रांसफ़र से होने वाली आय पर सीधा 30% टैक्स लगता है, साथ में लागू सरचार्ज और 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस। आपका इनकम स्लैब कुछ भी हो या आपने एसेट कितने भी समय तक रखा हो, दर यही रहती है (Candour Legal)। इस आय पर कोई बेसिक छूट सीमा नहीं है और लंबे समय तक रखने पर कोई कम दर भी नहीं। Candour Legal के अनुसार ऊंची आय वालों के लिए सरचार्ज और सेस जोड़कर प्रभावी मार्जिनल दर 42% से ज़्यादा हो सकती है।

नियम 2: सिर्फ़ ख़रीद की लागत घटा सकते हैं

आप सिर्फ़ ख़रीद की लागत (कॉस्ट ऑफ़ एक्विज़िशन) घटा सकते हैं। इसके अलावा एक्सचेंज फ़ीस, इंटरनेट बिल, हार्डवेयर, सलाह की फ़ीस, इनमें से कुछ भी नहीं घटाया जा सकता (धारा 115BBH(2)(a))।

नियम 3: घाटे का (लगभग) कोई फ़ायदा नहीं

सबसे ज़्यादा चोट यही नियम पहुंचाता है। एक VDA पर हुए घाटे को दूसरे VDA के मुनाफ़े से, किसी दूसरी आय से, या अगले सालों में सेट-ऑफ़ नहीं किया जा सकता (धारा 115BBH(2))। अगर एक ही साल में आपने बिटकॉइन पर ₹1 लाख कमाए और किसी दूसरे टोकन पर ₹1 लाख गंवाए, तब भी आपको ₹1 लाख के मुनाफ़े पर टैक्स देना होगा।

एक उदाहरण

मान लीजिए वित्त वर्ष 2026-27 में आप:

  • 0.01 BTC ₹60,000 में ख़रीदकर ₹75,000 में बेचते हैं → ₹15,000 का मुनाफ़ा;
  • ₹20,000 का कोई ऑल्टकॉइन ख़रीदकर ₹12,000 में बेचते हैं → ₹8,000 का घाटा।

टैक्स योग्य VDA आय ₹15,000 है, ₹7,000 नहीं। 30% टैक्स ₹4,500 बनता है, और 4% सेस (₹180) जोड़कर कुल ₹4,680 (किसी सरचार्ज से पहले, जो सिर्फ़ ऊंची आय पर लगता है)। ₹8,000 का घाटा बस ख़त्म हो जाता है।

(उदाहरण के आंकड़े केवल समझाने के लिए हैं।) अपने आंकड़ों के लिए हमारा क्रिप्टो टैक्स कैलकुलेटर इस्तेमाल करें।

नियम 4: बिक्री पर 1% TDS

ख़रीदार (असल में आपका एक्सचेंज) बिक्री की रक़म पर 1% TDS काटता है। अगर वित्त वर्ष में कुल रक़म “स्पेसिफ़ाइड पर्सन” (मोटे तौर पर बिना कारोबारी आय वाले या छोटे कारोबार वाले व्यक्ति/HUF) के लिए ₹50,000 और बाक़ी लोगों के लिए ₹10,000 से ज़्यादा नहीं है, तो TDS ज़रूरी नहीं (Tax Garden)। PAN न होने पर दर 20% हो जाती है (Candour Legal)।

TDS कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं है। यह एडवांस भुगतान है जो आपकी अंतिम टैक्स देनदारी में जुड़ जाता है। यह फ़ॉर्म 26AS/AIS में दिखता है और रिटर्न भरते समय आप इसका क्रेडिट लेते हैं।

नियम 5: शेड्यूल VDA में रिपोर्ट करें

क्रिप्टो मुनाफ़ा ITR-2 या ITR-3 (ITR-1 नहीं) के शेड्यूल VDA में दिखाया जाता है (Tax Garden)। इसके लिए हर लेन-देन की ख़रीद और ट्रांसफ़र की तारीख़, लागत और बिक्री मूल्य चाहिए होगा।

निगरानी का दायरा बढ़ रहा है

प्लेटफ़ॉर्म्स पर रिपोर्टिंग की ज़िम्मेदारियां तेज़ी से बढ़ रही हैं:

  • 1 अप्रैल 2026 से तय रिपोर्टिंग एंटिटीज़ को क्रिप्टो-एसेट लेन-देन के स्टेटमेंट दाख़िल करने होंगे, और फ़ाइनेंस एक्ट 2026 ने स्टेटमेंट न भरने पर ₹200 प्रति दिन और ग़लत जानकारी देने पर ₹50,000 का जुर्माना जोड़ा है (Tax Garden)।
  • भारत OECD के क्रिप्टो-एसेट रिपोर्टिंग फ़्रेमवर्क (CARF) की ओर बढ़ रहा है, जिसके लिए अप्रैल 2027 का रास्ता तय है (Candour Legal)। यानी विदेशी एक्सचेंजों का डेटा भी लगातार ज़्यादा मात्रा में भारतीय टैक्स अधिकारियों तक पहुंचेगा।
  • टैक्स विभाग ने ख़ुद चेताया है कि विदेशी प्लेटफ़ॉर्म पर ट्रेडिंग को ट्रैक करना मुश्किल है, और इसीलिए रिपोर्टिंग का दायरा बढ़ाया जा रहा है (Reuters)।

व्यावहारिक नतीजा: मानकर चलिए कि टैक्स विभाग आपके लेन-देन देख सकता है। कम आय दिखाना घाटे का सौदा है।

भारतीय क्रिप्टो निवेशकों के लिए चेकलिस्ट

  1. FIU-रजिस्टर्ड एक्सचेंज इस्तेमाल करें और 20% TDS से बचने के लिए अपना PAN लिंक रखें।
  2. पूरी ट्रांज़ैक्शन हिस्ट्री हर तिमाही एक्सपोर्ट करें, सिर्फ़ रिटर्न भरते समय नहीं।
  3. हर लेन-देन की लागत (कॉस्ट बेसिस) का हिसाब रखें; शेड्यूल VDA के लिए यह चाहिए।
  4. याद रखें, स्वैप भी गिने जाते हैं। एक टोकन को दूसरे से बदलना “ट्रांसफ़र” है और इस पर टैक्स बन सकता है।
  5. AIS/26AS में TDS को अपने एक्सचेंज स्टेटमेंट से मिलाएं।
  6. लॉस हार्वेस्टिंग पर भरोसा न करें: VDA के लिए यह काम नहीं करता।
  7. ITR-2 या ITR-3 इस्तेमाल करें, और अगर DeFi, स्टेकिंग या विदेशी प्लेटफ़ॉर्म पर गतिविधि है तो CA की मदद लें।
  8. नीतिगत ख़बरों पर नज़र रखें। SRO मॉडल, RBI की ओर से सख़्त पाबंदियां या रिपोर्टिंग के नए नियम, कुछ भी तस्वीर बदल सकता है।

निष्कर्ष

अक्टूबर 2026 तक भारत की क्रिप्टो नीति असल में “टैक्स लगाओ और नज़र रखो” वाली है। क्रिप्टो रखना और ट्रेड करना कानूनी है, प्लेटफ़ॉर्म्स का FIU-रजिस्टर्ड होना ज़रूरी है, और मुनाफ़े पर दुनिया के सबसे सख़्त टैक्स नियमों में से एक लागू होता है, जिसमें घाटे का सेट-ऑफ़ नहीं मिलता। औपचारिक रेगुलेटरी ढांचे पर बहस जारी है: RBI नियंत्रण पर ज़ोर दे रहा है और संसदीय समिति निगरानी वाले SRO मॉडल का सुझाव दे रही है। जब तक यह तय नहीं होता, नियमों का पालन ही आपकी सबसे अच्छी सुरक्षा है: साफ़ रिकॉर्ड, रजिस्टर्ड प्लेटफ़ॉर्म और सही रिटर्न।

स्रोत लेख में दिए गए हैं; स्थिति 12 अक्टूबर 2026 तक की। यह टैक्स, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।

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यह अंग्रेज़ी लेख का हिंदी संस्करण है। आंकड़े और स्रोत मूल लेख जैसे ही हैं।

और पढ़ें: भारत के लिए क्रिप्टो गाइड (कानून, ITR, TDS)